मंडला आंगनवाड़ी में 5 बच्चों ने खाई चूहा मार दवा, हालत स्थिर

मंडला आंगनवाड़ी में 5 बच्चों ने खाई चूहा मार दवा, हालत स्थिर

मध्य प्रदेश। मंडला जिले के एक आंगनवाड़ी केंद्र में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब 5 मासूम बच्चों ने केंद्र में रखी चूहा मारने की दवा खा ली। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सभी बच्चों को तत्काल नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से सभी बच्चों की हालत अभी स्थिर बताई जा रही है, लेकिन उन्हें अभी भी निगरानी में रखा गया है। यह घटना आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की सुरक्षा और कर्मचारियों की लापरवाही पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

कैसे हुई यह घटना?

जानकारी के अनुसार, मंडला जिले के इस आंगनवाड़ी केंद्र में चूहों की समस्या से निपटने के लिए कुछ दिन पहले ही दवा रखी गई थी। वह दवा केंद्र के उस हिस्से में रखी थी जहाँ बच्चों की आसान पहुँच थी। शनिवार को जब केंद्र में बच्चे मौजूद थे, तब कुछ मासूमों ने उस दवा को खाने की चीज़ समझकर मुँह में डाल लिया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को जैसे ही इसका पता चला, उसने तुरंत परिजनों और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र को सूचित किया। देखते ही देखते 5 बच्चों में उल्टी, बेचैनी और कमज़ोरी के लक्षण दिखने लगे। परिजन घबराए हुए थे और केंद्र के बाहर भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों में आक्रोश था कि इतनी खतरनाक दवा बच्चों की पहुँच में कैसे रखी गई।

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि सभी 5 बच्चों को एम्बुलेंस के ज़रिए जिला अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने तुरंत उपचार शुरू किया। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक बच्चों को पेट साफ करने की प्रक्रिया (गैस्ट्रिक लैवेज) से गुज़ारा गया और ज़रूरी दवाएँ दी गईं। शाम तक सभी बच्चों की स्थिति में सुधार देखा गया, हालाँकि डॉक्टर अभी भी उन्हें 24 से 48 घंटे निगरानी में रखना चाहते हैं।

अस्पताल में इलाज जारी, परिजनों में राहत और गुस्सा दोनों

जिला अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी ने बताया, “सभी 5 बच्चों को समय पर लाया गया, इसलिए स्थिति नियंत्रण में है। दवा की मात्रा कम थी, लेकिन यह बेहद ज़हरीली होती है। अगर थोड़ी और देर हो जाती तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।” उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को अगले 48 घंटे तक अस्पताल में रखा जाएगा ताकि किसी भी जटिलता से बचा जा सके।

बच्चों के परिजन अस्पताल के बाहर जमा थे। एक बच्चे की माँ ने रोते हुए कहा कि उसे सुबह आंगनवाड़ी भेजते वक्त ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि ऐसा कुछ हो सकता है। परिजनों का गुस्सा आंगनवाड़ी कर्मचारियों और प्रशासन पर था। उनका कहना था कि यह घोर लापरवाही है और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि भी मौके पर पहुँचे और प्रशासन से जवाब माँगा।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और जाँच के आदेश

मंडला जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से पूछताछ की जा रही है और यह देखा जा रहा है कि दवा किसके निर्देश पर और किसने रखी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “यह लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।” साथ ही जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी प्रकार की कीटनाशक या ज़हरीली दवा बच्चों की पहुँच से दूर रखी जाए।

विपक्षी दलों ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति बेहद दयनीय है और इन केंद्रों पर न तो पर्याप्त निगरानी है, न ही बुनियादी सुरक्षा इंतज़ाम। उन्होंने दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की।

आंगनवाड़ी केंद्रों में सुरक्षा का सवाल

यह पहली बार नहीं है जब आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हों। देश के कई राज्यों में इससे पहले भी ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं जहाँ केंद्रों में खाने की गुणवत्ता, साफ-सफाई और बच्चों की निगरानी को लेकर शिकायतें दर्ज हुई हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने कई बार राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। मध्य प्रदेश में करीब 97,000 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहाँ लाखों बच्चे प्रतिदिन जाते हैं। इन केंद्रों पर कर्मचारियों की तैनाती, प्रशिक्षण और नियमित निरीक्षण की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की है।

बाल विकास विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में किसी भी रासायनिक पदार्थ को रखने से पहले उचित प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए। बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाना सिर्फ कागज़ों पर नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर लागू होना चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि नीतियाँ चाहे जितनी अच्छी हों, उनका क्रियान्वयन उतना ही ज़रूरी है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सभी 5 बच्चे अस्पताल में हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। जाँच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस लापरवाही के लिए कौन ज़िम्मेदार है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। सवाल यह है कि क्या यह जाँच सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह जाएगी, या इस बार वाकई कोई ठोस बदलाव आएगा? मंडला की यह घटना पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी है — आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

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