बेरूत/तेल अवीव। लेबनान से हिज्बुल्लाह ने शनिवार को इजरायली शहरों पर मिसाइल और ड्रोन से ताबड़तोड़ हमले किए। यह जवाबी कार्रवाई उन 13 हिज्बुल्लाह लड़ाकों की मौत के बाद हुई, जो इजरायली हवाई हमलों में मारे गए थे। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है।
हिज्बुल्लाह का पलटवार — मिसाइल और ड्रोन से हमला
लेबनान स्थित हिज्बुल्लाह ने साफ कर दिया है कि वह झुकने वाला नहीं। संगठन ने इजरायल के उत्तरी इलाकों को निशाना बनाते हुए कई मिसाइलें दागीं। ड्रोन हमलों ने भी इजरायली सुरक्षा बलों को चौकस कर दिया। इजरायल के आयरन डोम सिस्टम ने कुछ हमलों को रोका, लेकिन नुकसान की खबरें भी सामने आई हैं।
हिज्बुल्लाह के एक प्रवक्ता ने कहा, “हमारे 13 शहीद लड़ाकों का खून बेकार नहीं जाएगा — यह सिर्फ शुरुआत है।” संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक इजरायल अपने हमले बंद नहीं करता, तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।
सीज़फायर वार्ता से इनकार — बातचीत की राह बंद
अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बावजूद हिज्बुल्लाह ने युद्धविराम वार्ता से साफ इनकार कर दिया। कई देशों और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि दोनों तरफ से हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे।
इजरायल ने भी अपने हमले जारी रखे हैं। इजरायली सेना के अनुसार, लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। दोनों पक्षों की यह जिद मध्य पूर्व को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल रही है।
कोलंबिया का बड़ा कदम — इजरायल के बहिष्कार का आह्वान
इस संघर्ष की आँच अब लैटिन अमेरिका तक पहुँच गई है। कोलंबिया के राष्ट्रपति ने इजरायल के आर्थिक और राजनयिक बहिष्कार का खुला आह्वान किया। उन्होंने इजरायली कार्रवाई को “मानवता के खिलाफ” बताया और अन्य देशों से भी एकजुट होने की अपील की।
यह पहली बार नहीं है जब किसी देश ने इजरायल के खिलाफ ऐसा रुख अपनाया हो, लेकिन कोलंबिया जैसे देश का इस तरह सामने आना अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोड़ है। सवाल यह है कि क्या अन्य देश भी इस आह्वान पर कदम उठाएंगे?
मध्य पूर्व में बढ़ता संकट — आम नागरिक सबसे ज़्यादा प्रभावित
इस पूरे मामले की जड़ में वह आम नागरिक है जो न इजरायल में चैन से सो पा रहा है, न लेबनान में। दोनों देशों में आम लोग बमबारी और हमलों के बीच जीने को मजबूर हैं।
- इजरायल के उत्तरी शहरों में नागरिकों को बंकरों में शरण लेनी पड़ रही है।
- लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों के पास रहने वाले लोग विस्थापित हो रहे हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने दोनों पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है।
आगे क्या?
फिलहाल न युद्धविराम के कोई संकेत हैं, न बातचीत की कोई उम्मीद। हिज्बुल्लाह का रुख आक्रामक है और इजरायल भी पीछे हटने के मूड में नहीं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका अभी तक सीमित रही है।
आने वाले दिनों में यह संघर्ष और गहरा हो सकता है। मध्य पूर्व की यह आग पूरी दुनिया की चिंता बन चुकी है — और सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसे बुझाएगा कौन?


