पटना। शनिवार की दोपहर पटना मेट्रो निर्माण स्थल पर एक दर्दनाक हादसा हुआ। काम के दौरान अचानक एक भारी-भरकम कंक्रीट स्लैब गिर गई और उसके नीचे एक मजदूर दब गया। बड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला गया, लेकिन हालत गंभीर बनी हुई है। फिलहाल उसे नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टर उसकी जान बचाने की कोशिश में जुटे हैं।
कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मजदूर निर्माण स्थल पर अपना नियमित काम कर रहा था, तभी ऊपर से एक भारी स्लैब अचानक टूटकर नीचे आ गिरी। देखते ही देखते वह मजदूर उसके नीचे दब गया। साथी मजदूरों ने तुरंत मदद की कोशिश की, लेकिन स्लैब का वज़न इतना अधिक था कि हाथों से हटाना नामुमकिन था।
काफी मशक्कत और मशीनी सहायता के बाद घायल मजदूर को बाहर निकाला जा सका। इस पूरी प्रक्रिया में काफी वक्त लगा, जिससे उसकी चोटें और गहरी हो गईं। मौके पर मौजूद एक साथी मजदूर ने बताया — “हम सब देखते रह गए, कुछ समझ नहीं आया। बस चीख सुनाई दी और सब दौड़ पड़े।”
अस्पताल में नाजुक हालत
घायल मजदूर को तत्काल पास के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उसकी हालत को गंभीर बताया है। सिर और छाती पर गहरी चोटें आई हैं। इलाज जारी है और परिजनों को सूचित कर दिया गया है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मजदूर की हालत अभी नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की एक टीम उस पर नज़र रख रही है। अगले 24 घंटे उसके लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर गया है। पटना मेट्रो परियोजना राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढाँचा योजनाओं में से एक है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपकरणों और प्रोटोकॉल की अनदेखी अक्सर देखी जाती है।
- क्या मजदूर को हेलमेट और सेफ्टी गियर दिया गया था?
- स्लैब की गुणवत्ता जाँच हुई थी या नहीं?
- साइट पर सुपरवाइज़र की मौजूदगी थी?
इन सवालों का जवाब अभी तक सामने नहीं आया है। स्थानीय प्रशासन ने घटना की जानकारी ली है, लेकिन किसी अधिकारी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
पटना मेट्रो निर्माण कार्य पिछले कुछ वर्षों से चल रहा है। इससे पहले भी साइट पर छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं की खबरें आती रही हैं। मजदूर संगठनों का कहना है कि निर्माण कंपनियाँ अक्सर समयसीमा के दबाव में सुरक्षा नियमों से समझौता करती हैं।
सवाल यह है कि आखिर कब तक मजदूरों की जान इस तरह जोखिम में डाली जाती रहेगी? हर बड़े प्रोजेक्ट की नींव में उन हाथों का पसीना होता है जो सबसे कम सुरक्षित हैं।
आगे क्या?
प्रशासन से माँग की जा रही है कि घटना की उच्चस्तरीय जाँच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। घायल मजदूर के परिवार को मुआवज़ा और उचित इलाज मिलना चाहिए। साथ ही, पूरे निर्माण स्थल का सुरक्षा ऑडिट तत्काल कराया जाना चाहिए — ताकि ऐसा हादसा दोबारा न हो।
